बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी के आह्वान पर 7 से 16 नवंबर तक दिल्ली से शुरू होने वाली ‘सनातन हिंदू एकता पदयात्रा’ में देशभर से लाखों श्रद्धालु शामिल होंगे। कोटा से भी भक्तों की बड़ी टुकड़ी इस यात्रा में भाग लेने को तैयार, सनातन संस्कृति और राष्ट्र एकता का संदेश बनेगा केंद्रबिंदु।

छतरपुर (मध्य प्रदेश):
बागेश्वर धाम सरकार के प्रमुख पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराज द्वारा प्रस्तावित “सनातन एकता पदयात्रा” को लेकर देशभर में उत्साह का माहौल है। यह यात्रा सनातन धर्म, सामाजिक समरसता और राष्ट्र एकता का संदेश लेकर निकलेगी। धार्मिक और सामाजिक संगठनों के साथ-साथ आम श्रद्धालु भी इस यात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।


🚩 उद्देश्य: धर्म, राष्ट्र और समाज की एकता

पं. धीरेंद्र शास्त्री ने इस पदयात्रा की घोषणा करते हुए कहा था कि “जब तक सनातन सुरक्षित है, तब तक भारत सुरक्षित है।”
इस यात्रा का मूल उद्देश्य लोगों को धर्म, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के सूत्र में जोड़ना है। शास्त्रीजी का कहना है कि आज समाज में बढ़ती वैचारिक विभाजन रेखाओं के बीच सनातन एकता ही वह सूत्र है जो भारत को एकजुट रख सकता है।


🕉️ कार्यक्रम और आयोजन की तैयारी

बागेश्वर धाम पीठ से मिली जानकारी के अनुसार, यात्रा की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। विभिन्न राज्यों में शिष्य मंडल और स्वयंसेवक संगठन स्तर पर रूट चार्ट, ठहराव स्थल और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सक्रिय हैं।
हर पड़ाव पर धार्मिक सभाएँ, भजन संध्या, प्रवचन और हनुमान कथा जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

यात्रा में शामिल भक्तों को ‘एकता, शांति और धर्मरक्षा’ का संदेश दिया जाएगा। कई धार्मिक संत-महात्मा और अखाड़ा परिषदों ने भी इस पहल को सराहना दी है।


🌸 जन-जन में उत्साह और समर्थन

देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सोशल मीडिया पर इस पदयात्रा के समर्थन में पोस्ट साझा की हैं। ट्विटर (X), इंस्टाग्राम और फेसबुक पर #SanatanEktaPadyatra और #BageshwarDham जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
युवा वर्ग विशेष रूप से इस यात्रा को लेकर उत्साहित है और इसे “सनातन चेतना का महाअभियान” कह रहे हैं।


⚠️ प्रशासनिक तैयारी और अनुमति

कुछ क्षेत्रों में इस पदयात्रा के रूट और भीड़ प्रबंधन को लेकर प्रशासन ने अनुमति और सुरक्षा के मुद्दों पर विचार-विमर्श शुरू किया है।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि वे शांतिपूर्ण और सुरक्षित आयोजन के लिए आयोजकों के साथ लगातार संपर्क में हैं।
हालांकि कुछ स्थानों पर इस यात्रा को लेकर विरोध और राजनीतिक बयानबाज़ी भी देखने को मिली है, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों के अनुसार ही आगे की कार्यवाही होगी।


🗣️ शास्त्रीजी का संदेश

पं. धीरेंद्र शास्त्री ने एक सभा में कहा —

“सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि जीवन जीने की परंपरा है।
यह यात्रा किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर चलने का संकल्प है।”

उन्होंने कहा कि यह यात्रा समाज में प्रेम, करुणा और एकता का संदेश लेकर निकलेगी, जिससे हर वर्ग और समुदाय के लोग ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना से जुड़ सकें।


🕊️ धर्माचार्य और संगठनों की प्रतिक्रिया

अखिल भारतीय संत परिषद, कुछ धार्मिक पीठों और साधु-संतों ने इस यात्रा का स्वागत किया है। उनका कहना है कि वर्तमान समय में धर्म और संस्कृति की एकजुटता बेहद आवश्यक है।
वहीं, कुछ सामाजिक संगठनों ने यह भी कहा है कि यात्रा का संदेश सद्भाव और सौहार्द के साथ होना चाहिए ताकि कोई सामाजिक विवाद न उत्पन्न हो।


🌏 देशव्यापी प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पदयात्रा नियोजित रूप से संपन्न होती है, तो यह देशभर में सनातन एकता का प्रतीकात्मक अभियान बन सकती है।
इससे न केवल धार्मिक जागरूकता बढ़ेगी बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव को भी बल मिलेगा।


📢 लोगों की अपेक्षाएँ

श्रद्धालुओं का कहना है कि वे इस यात्रा में शामिल होकर आध्यात्मिक ऊर्जा और राष्ट्र प्रेम का अनुभव करना चाहते हैं।
कई भक्तों ने बताया कि वे अपने परिवार सहित इस पदयात्रा में भाग लेंगे और बागेश्वर धाम सरकार से आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।


🛕 निष्कर्ष

बागेश्वर धाम के पं. धीरेंद्र शास्त्री की “सनातन एकता पदयात्रा” न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
यह यात्रा आने वाले दिनों में देश की आध्यात्मिक चेतना को नई दिशा दे सकती है और सनातन धर्म की एकता को और सशक्त बना सकती है।


📅 स्रोत: बागेश्वर धाम पीठ, स्थानीय प्रशासनिक सूत्र, और सोशल मीडिया अपडेट्स।

धर्म और राष्ट्र एकता के पावन संदेश के साथ बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज के आह्वान पर एक ऐतिहासिक अध्याय लिखने की तैयारी शुरू हो चुकी है। आगामी 7 नवंबर से 16 नवंबर तक दिल्ली से प्रारंभ होने वाली ‘सनातन हिंदू एकता पदयात्रा’ में पूरे देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। इस विशाल यात्रा का उद्देश्य सनातन संस्कृति, धर्म, प्रेम और राष्ट्रीय एकता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना है। कोटा में इस यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था और उत्साह का माहौल है। श्री बागेश्वर धाम शिष्य मंडल परिवार कोटा के प्रभारी अनुज शर्मा ने बताया कि जिलेभर के भक्त बड़ी संख्या में इस पदयात्रा का हिस्सा बनने की तैयारी में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि “यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का संकल्प है। हर अनुयायी इस संदेश को अपने जीवन का हिस्सा बना रहा है।” अनुज शर्मा के अनुसार, कोटा से निकलने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष बसों और अन्य साधनों की व्यवस्था की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक भक्त इस दिव्य यात्रा में सम्मिलित हो सकें। श्रद्धालु समूहों द्वारा लगातार संपर्क कर यात्रा की तैयारी को अंतिम रूप दिया जा रहा है। यह पदयात्रा दिल्ली से प्रारंभ होकर विभिन्न नगरों, तीर्थ स्थलों और ग्रामीण अंचलों से गुजरते हुए आगे बढ़ेगी। मार्ग में अनेक स्थलों पर राम नाम संकीर्तन, हनुमान चालीसा पाठ और राष्ट्र एकता के विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इन आयोजनों के माध्यम से भक्तजन समाज में सनातन संस्कृति की जीवंत भावना, धर्म के प्रति जागरूकता, प्रेम और सद्भाव का संदेश फैलाने का संकल्प ले रहे हैं। बागेश्वर धाम सरकार की यह पहल केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत के सांस्कृतिक एकत्व और सनातन चेतना के पुनरुत्थान का प्रतीक मानी जा रही है। इस यात्रा से देशभर में धर्म, एकता और अखंड भारत के विचार को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। यह यात्रा केवल पैरों से नहीं, बल्कि आस्था, श्रद्धा और राष्ट्र प्रेम से आगे बढ़ने वाला आंदोलन है — एक ऐसा आंदोलन जो भारत की आत्मा को पुनः जागृत करने जा रहा है।